प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने अपने दस वर्षों की यात्रा में भारत में सशक्तिकरण और उद्यमशीलता को एक नई दिशा दी है। 8 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस योजना की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि “मुद्रा योजना के 10 साल सशक्तिकरण और उद्यमिता के प्रतीक रहे हैं। इसने दिखाया है कि सही समर्थन मिलने पर भारत के लोग चमत्कार कर सकते हैं।”


योजना का उद्देश्य और उपलब्धियाँ:
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को जमानत-मुक्त ऋण प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। इस योजना के अंतर्गत अब तक ₹33 लाख करोड़ से अधिक के 52 करोड़ ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 70% ऋण महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण को जबरदस्त प्रोत्साहन मिला है। साथ ही 50% लाभार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं, जो सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।
रोज़गार सृजन और नए उद्यमों को बढ़ावा:
मुद्रा योजना ने पहली बार व्यापार करने वाले उद्यमियों को ₹10 लाख तक के ऋण देकर नए व्यवसाय स्थापित करने की राह आसान की है। योजना के पहले तीन वर्षों में ही इसने 1 करोड़ से अधिक नौकरियों का सृजन किया। बिहार जैसे राज्य इस योजना के अंतर्गत लगभग 6 करोड़ ऋणों की स्वीकृति के साथ उद्यमशीलता में अग्रणी बनकर उभरे हैं, जो यह दर्शाता है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नींव बन चुकी है।