एक विवाह ऐसा भी : ख आदिवासी समाज ने पेश की

मुंगेली।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में आदिवासी समाज ने विवाह संस्कार को सरल और खर्चमुक्त बनाने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल करते हुए “आदर्श गोंडवाना सामूहिक विवाह कार्यक्रम” का भव्य आयोजन किया। इस अवसर पर समाज ने दिखावे और फिजूलखर्ची से परे, रीति-रिवाजों के अनुसार 31 जोड़ों का विवाह सम्पन्न कर एक नई मिसाल पेश की।



कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव और विधायक धरमलाल कौशिक भी शामिल हुए। डिप्टी सीएम साव ने आदिवासी समाज के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम समाज सुधार की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जिसे अन्य समाजों को भी अपनाना चाहिए। वहीं विधायक कौशिक ने बताया कि इस सामूहिक विवाह में शामिल सभी जोड़ों को मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत लाभ प्रदान किया गया है। जनप्रतिनिधियों ने नवविवाहित जोड़ों को उपहार भेंट कर आशीर्वाद भी दिया।

सामाजिक पदाधिकारियों ने रखे अपने विचार
केंद्रीय गोंड महासभा मुंगेली के जिला मीडिया प्रभारी कृष्णा ध्रुव ने कहा कि हमारे समाज में दिखावे की प्रवृत्ति के चलते डीजे, टेंट और भव्य आयोजनों पर अत्यधिक खर्च किया जाता है। इसी कारण कई परिवार आर्थिक संकट में आ जाते हैं और विवाह के बाद पलायन की स्थिति भी बन जाती है। सामूहिक विवाह जैसे आयोजन से इस समस्या का समाधान संभव है।

जिला अध्यक्ष वीरेंद्र मरावी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी धूमधाम से विवाह तो करती है, लेकिन इसकी कीमत उनके माता-पिता को चुकानी पड़ती है। सीमित आय वाले परिवारों को रिश्तेदारों और समाज के लोगों के लिए बड़े स्तर पर भोज का आयोजन करना पड़ता है, जिससे वे आर्थिक बोझ तले दब जाते हैं।

सर्व आदिवासी समाज युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी हमारे समाज में गोंडीय रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न हो रहा है। समाज के युवाओं से लेकर वरिष्ठजनों तक ने इस आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे यह कार्यक्रम सफल हो पाया। उन्होंने कहा कि भविष्य में और भी बड़े स्तर पर सामूहिक विवाह आयोजित किए जाएंगे, ताकि खर्च मुक्त विवाह का लक्ष्य व्यापक रूप से साकार हो सके।

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